Tughlak - PDF free download eBook

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  • Published: 22.01.2019
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Introduction

तुगलक मोहममद तुगलक चारितरिक विरोधाभास में जीनेवाला एक ऐसा बादशाह था जिसे इतिहासकारों ने उसकी सनकों के लिए खबती करार दिया। जिसने अपनी सनक के कारण राजधानी बदली और ताँबे के सिकके का मूलय चाँदी के...

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Details of Tughlak

Original Title
Tughlak
Edition Format
Paperback
Number of Pages
160 pages
Book Language
Hindi
Ebook Format
PDF, EPUB

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Some brief overview of this book

तुगलक मोहममद तुगलक चारितरिक विरोधाभास में जीनेवाला एक ऐसा बादशाह था जिसे इतिहासकारों ने उसकी सनकों के लिए खबती करार दिया। जिसने अपनी सनक के कारण राजधानी बदली और ताँबे के सिकके का मूलय चाँदी के सिकके के बराबर कर दिया। लेकिन अपने चारों ओर कटटर मजहबी दीवारों से घिरा तुगलक कुछ और भी था। उसने मजहब से परे इंसान की तलाश की थी। हिंदू और मुसलमान दोनों उसकी नजर में एक थे। ततकालीन मा तुग़लक मोहम्मद तुग़लक चारित्रिक विरोधाभास में जीनेवाला एक ऐसा बादशाह था जिसे इतिहासकारों ने उसकी सनकों के लिए ख़ब्ती करार दिया। जिसने अपनी सनक के कारण राजधानी बदली और ताँबे के सिक्के का मूल्य चाँदी के सिक्के के बराबर कर दिया। लेकिन अपने चारों ओर कट्टर मज़हबी दीवारों से घिरा तुग़लक कुछ और भी था। उसने मज़हब से परे इंसान की तलाश की थी। हिंदू और मुसलमान दोनों उसकी नज़र में एक थे। तत्कालीन मानसिकता ने तुग़लक की इस मान्यता को अस्वीकार कर दिया और यही ‘अस्वीकार' तुग़लक के सिर पर सनकों का भूत बनकर सवार हो गया। नाटक का कथानक मात्र तुग़लक के गुण-दोषों तक ही सीमित नहीं है। इसमें उस समय की परिस्थितियों और तज्जनित भावनाओं को भी अभिव्यक्त किया गया है, जिनके कारण उस समय के आदमी का चिंतन बौना हो गया था और मज़हब तथा सियासत के टकराव में हरेक केवल अपना उल्लू सीधा करना चाहता है।


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